निज़ामाबाद ( एजन्सी),राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को इस बात को फिर से दोहराया कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने हिंदुओं को जागृत करने के लिए संघ की स्थापना की थी। निज़ामाबाद जिले के रंजाल मंडल के कंडाकुर्थी में ‘केशव स्फूर्ति मंदिर’ का उद्घाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने याद दिलाया कि भले ही डॉ. हेडगेवार का जन्म और निधन नागपुर में हुआ था, लेकिन उनके पूर्वज कंडाकुर्थी के रहने वाले थे, जो अब तेलंगाना में है। यही कारण है कि कंडाकुर्थी में निर्मित केशव स्फूर्ति मंदिर का विशेष महत्व है। आरएसएस प्रमुख ने उस पौराणिक घटना का उल्लेख किया जिसमें गरुड़ अपनी माता को गुलामी से मुक्त कराने के लिए स्वर्ग से अमृत लेकर आए थे और बाद में वह अमृत इंद्र को वापस कर दिया था। मोहन भागवत ने रेखांकित किया, “गरुड़ अपने लिए अमृत नहीं लाए थे, बल्कि अपनी माता को आजाद कराने के लिए लाए थे। इसी तरह, हेडगेवार ने भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने के लिए आरएसएस की स्थापना की थी।”हिंदुओं की एकता और भविष्य की सुरक्षा पर जोर उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि अंग्रेजों से पहले भी कई विदेशियों ने भारत पर शासन किया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हिंदू एकजुट नहीं थे। हेडगेवार का मानना था कि यदि हिंदू समाज जागृत नहीं हुआ, तो भविष्य में वह फिर से गुलाम हो सकता है। मोहन भागवत ने स्पष्ट किया, “आरएसएस का गठन हिंदुओं को जगाने के लिए किया गया है, ताकि वे दोबारा पराधीन न हों।” उन्होंने कहा कि हेडगेवार ने सेवा और देशभक्ति की भावना कंडाकुर्थी से ही प्राप्त की थी, इसलिए यहाँ केशव स्फूर्ति मंदिर का होना प्रेरणादायक है। इस सभा में सांसद धर्मपुरी अरविंद, विधायक पी. सुदर्शन रेड्डी, धनपाल सूर्यनारायण, राकेश रेड्डी और पायल शंकर उपस्थित रहे। साथ ही कंडाकुर्थी के सरपंच गियाजुद्दीन, बी.वी. आर. मोहन रेड्डी, चामाकुरा सुधाकर रेड्डी और कई अन्य आरएसएस नेता भी इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के साक्षी बने।



